जो दीवाल पर लिखा नहीं पढ़ पाते ,गडकरीजी उन्हें कौन समझाये क्योंकि वे आँख,कान, नाक और
दिमाग से भी पैदल हो जाते हैं।आपकी अध्यक्षता में उम्मीद नहीं कि सौ से अधिक भाजपा के सांसद
लोकसभा का मुँह देख पायेंगे। भय,भूख और भ्रष्टाचार से देश की मुक्ति का तो अब सवाल ही पैदा
नहीं होता, पार्टी विद डिफरेन्स तो दूर की कौड़ी है। राम.....राम.....
दिमाग से भी पैदल हो जाते हैं।आपकी अध्यक्षता में उम्मीद नहीं कि सौ से अधिक भाजपा के सांसद
लोकसभा का मुँह देख पायेंगे। भय,भूख और भ्रष्टाचार से देश की मुक्ति का तो अब सवाल ही पैदा
नहीं होता, पार्टी विद डिफरेन्स तो दूर की कौड़ी है। राम.....राम.....
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