Sunday, January 12, 2020


सी ए ए, एन आर पी, एन आर सी

                                                                नववर्ष  2020
सभी मित्रों अमित्रों को नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ,
नये साल में नये ढंग से उठते नये सवालों से,सावधान रहना है यारों,नंगे रंगे सियारों से।
मानवता का झंडा थामे नये नये नक्कालों से,सावधान रहना है हमको राष्ट्रविरोधी चालों से।।
टुकड़े टुकड़े गैंग बनाकर देश तोड़ने वालों से,सावधान रहना है हमको नक्सलवादी चालों से।
सावधान रहना है हमको रोमीला इरफानों से,झूठ खूब बेचा है जिनने उन सारे बेइमानों से।।



















































                                   ( CAA,NRP,NRC ) सीएए,एनआरपी,एनआरसी

सीएए पर झूठ परोसें जनगणना पर रोते हैं,राष्ट्र राष्ट्रीयता की बातें जो हल्के में लेते हैं।
जिन्हें रोहिंग्या बंगलादेशी बहुत दुलारे लगते हैं,कान खोलकर सुनलो हम तो बस अपनों पर मरते हैं।          हिन्दू मुसल्मान या जैनी सिक्ख पारसी क्रिस्तानी,भाई हैं सब इन्हें लड़ाते भड़काते हैं अज्ञानी।
सिर पटको या करो सुसाइड हमें न हल्के में लेना,नेहरू का यह नहीं जमाना हमें न अब धमकी देना।
देश ये उनका वही रहेंगे जिनको इससे है नाता,इसे धर्मशाला मत समझो यह अपनी भारत माता।
इसका जिसने दूध पिया है वही यहाँ रह पायेगा,जो भारत माँ की जय बोले वही शरण भी पायेगा।
अरे, प्रताड़ित हैं जो पाकी बंगलादेशी अफगानी,सी ए ए में वही रहेंगे नहीं चलेगी मनमानी।।





Wednesday, March 20, 2019

23 मई 2019 को होली फिरसे मनायेंगें



चलो 23 मई को होली फिरसे मनायेंगें
फाग गायेंगें
राहुल यदि अमेठी से जीतकर आते हैं
तो
माया अखिलेश ही श्रेय पायेंगें
अस्सी में साठ जीते अमित शाह
तो
सभी लोग छुटभैयों को गरियायेंगें
राहुल और प्रियंका को बचायेंगें
543 में 280 भाजपा ने
और
350 एनडीए ने बटोरीं
तो
बापू खुश हो जायेंगें
राहुल प्रियंका सोनिया
तब
चाहे जितना जोर लगालें
चालीस पार नहीं कर पायेंगें।
चलो 23 मई को फिरसे होली मनायेंगें
फगुआ गायेंगें।
मोदी यदि फिरसे चौकीदारी पागये
तो
माल्या नीरव और चौकसी की
चौकी निकलवायेंगें
किसको कितना खिलाया
सच के साथ सब उगलवायेंगें
मोदी शर्तिया कमीशन खायेंगें
36 नहीं 136 राफेल लायेंगें
सेना का मनोबल बढ़ायेंगें
और
पाक को बार बार सबक सिखायेंगे
तब
सेना पर 130 करोड़ लोग बलिहारी जायेंगें
भारत को तीसरी आर्थिकशक्ति बनायेंगें
अधूरे रह गये सपनों को पंख लगायेंगें
भ्रष्टों से कोशिश भर देश को बचायेंगें।
चलो 23 मई को फिरसे होली मनायेंगें
फगुआ गायेंगें।
प्रधान सेवक बन गये मोदी
तो
रोज रोज जमानत लेकर ऐश करनेके भी
राज खोलेंगें
बेनामी कमाई और आय से अधिक
सम्पत्तियों पर नकेल लगायेंगें
370 का समाधान निकालेंगें
स्वच्छता के प्रतिमान बनायेंगें
सेवकाई के नये गुर बतायेंगें
सबके साथ सबके विकास का
अपना धर्म फिरसे निभायेंगें
अपना धर्म फिरसे निभायेंगें।।
चलो 23 मई को फिरसे होली मनायेंगें।
फगुआ गायेंगें।।


Saturday, December 22, 2018

नव वर्ष 2019

नये वर्ष में हर्ष से गले मिलें सब लोग,हों प्रसन्न हँसते रहें मिटें सभी के रोग।
कर्ज मुक्त हों कृषकजन,भगवामुक्त प्रदेश,पप्पू घर घर जन्म लें फैलाओ संदेश।

ए.जे.एल. को दान में मिले जमीन मकान,नगर डगर वाड्रा बसें ऐसा बने विधान।
अ सहिष्णुता देखिये गर्दन रही उठाय,मियाँ नसीरुद्दीन की लगी देश को हाय ।

दुर्जन निकला देखिये जिसका सज्जन नाम,सरदारों के कत्ल का है जिसपर इल्जाम।
बीबी (नैना)को तंदूर में भूना जिसने यार,सजा भुगत कर आगया नाम सुशीलकुमार।

दोनों का दल एक है एक समान विचार,इक दुर्जन है दूसरा इस धरती पर भार।
नये साल में देखिये आगस्ता राफेल,कौन पास होगा मियाँ कौन रहेगा फेल।
(रागा होगा फेल या मोदी होंगे फेल।।)

नव वर्ष 2018

हार गये पर हार न मानें, छौंक रहे हैं शान।
जीते को हारा कहें अपना सीना तान।।
एक एक घर पीछे हटते प्यादे हुए निढाल।
राजा रानी हाथी धोड़े सब के सब बेहाल।।
औरों के कँधे पर चढ़ कर खुद को मानें वीर।
लक्ष्यहीन से चला रहे हैं आँख मूँद कर तीर।।
मणिशंकर सिब्बल से नेता जिनके खेवन हार।
उन्हें न दुश्मन पड़ें खोजने करने बंटाढार।।

दीपावली 2017

चलो दीप में स्नेह डाल कर उन्हें जलालें,धरती पर आकाश उतारें शीश झुका लें।
खील बताशे बाटें, मन का मैल मिटालें,सबका ही हो साथ सभी को सब अपना लें।
सब हों सुखी निरोगी सबकी निर्मल काया,सबका हो कल्याण धरा परिवार बना लें।।

जो धरती पर आग लगा कर करें तमाशा,उनको उनकी ही भाषा में मिले तमाचा।
शठ को शठ की तरह सजा हो भूल न जाना,लातों नाला भूत बात से कब है माना।
देश हमारा हमको प्यारा धरम जात बेमानी है,हम भारत माँ की सन्तानें भारत के सेनानी हैं।।

चलो होली (2017) मनाते हैं

।। चलो होली (2017) मनाते हैं ।।
चलो होली मनाते हैं/ सबसे पहले कानपुर के देशप्रेमी मो.सरताज़ को सलाम बजा लाते हैं / उन्हें गले लगाते हैं।
फिर  /सबका साथ सबका विकासकी समर्थक जनता को प्रणाम करते हैं / बाबा विश्वनाथ और सोमनाथ का दर्शन करते हैं/  'काम बोलता है'  का ढोल पीटने वालों तथा चारा चबानेवाले समधी का मान मर्दन करते हैं।

चलो/ फिर गुजरात चलते हैं / सैफई के सफारी में आये गुजरात के गिर के शेरों की तरह/ दो बैसाखनंदन लाते हैं/
एक पर पप्पू को तो एक पर 'कामबोलता अक्कू' को बिठाते हैं / दोनों के माथे पर चंदन और केसरिया गुलाल लगाते हैं/ मोदी के स्वच्छता अभियान की भावना के तहत/ एक के पीछे झब्बर और अय्यर को/ तो एक के पीछे
माल मालामाल को लगाते हैं।

 होली है तो अमर सिंह की बात भी बताते हैं/ जो पप्पू की खटिया खड़ी कराते हैं/ समाजवादियों की जड़ में मट्ठा डलवाते और उनको अब जड़से उखाड़ फेंकने की कसमें खाते हैं।

चलो /विजय की भंग पीकर गाने बजाने वालों की/ बारात सजाते हैं/ कीचड़ में कमल खिलाते हैं / सबके साथ सबके विकास का नगाड़ा बजाते हैं/
चलो होली मनाते हैं.......... चलो होली मनाते हैं।।/

यूपी चुनाव 2017

लो पछुआ चलने लगा पत्ते गिरे तमाम। सिंहासन हिलने लगा सत्ता हुई धड़ाम ।।
वादे नारे शोरगुल क़ब्रगाह शमशान। जनता ने साबित किये सच्चे झूठे काम।।
टीपू औरंगजेब बन खूब रहे थे झूल। झूला टूटा डाल से गये हेकड़ी भूल।।
पंजे ने गर्दन पकड़ उनको दिया मरोड़। जनता घपले जानती लाखों लाख करोड़ ।।
आज़म अब्बू आज़मी गायत्री गोपाल। लो नरेश नन्दा फँसे अमरसिंह के जाल ।।
लालू की हँफनी बढ़ी हाँक रहे थे डींग। चारे से पेंचिश बढ़ी चाट रहे हैं हींग।।
बब्बर भी खप्पर लिये माँग रहे हैं भीख। मणिशंकर देने चले पप्पू जी को सीख -
हार जीत जीवन मरण समय समय की बात, अंधकार जितना घना उतना शुभ्र प्रभात ।।
दिग्गी राजा कह रहे बड़े पते की बात, बिन बदले आना नहीं जलदी नया प्रभात ।
पंजे ने गर्दन पकड़ उसको दिया मरोड़, घपले जनता जानती लाखों लाख करोड़ ।।
जाति धर्म सब भूल कर सबने मानी बात, अमित शाह मोदी मुदित पाकर सबका साथ।.
केसरिया होली हुई खिला कमल का फूल, बुआ और बबुआ गिरे दिखे चा़टते धूल।।




Sunday, February 5, 2017

समाजवादी सरकार

टू जी  पीकर खा गये  जो कोयला भंडार । उन्हें शरण देते दिखे खनन माफिया यार ।।
हैंडिल थामे हाथ में बैक सीट पर बैठ । परधानी का ख्वाब है पूँछ रहे हैं ऐँठ ।।
इशरत के पीछे खड़े तीस्ता का ले साथ । दो सूडो सेक्युलर चले दिये हाथ में हाथ ।।
  X                                                      X                                                  X
यारों,आ कर देखिये ये समाज का वाद । जाति धर्म को देख कर ये बाँटें हैं खाद ।।
कब्रगाह को मिल रहा सरकारी अनुदान । मरघट सब बदहाल हैं कोई न देता ध्यान ।।
अंधे बाँटे रेवड़ी अपनों को ही दें । चचा भतीजे भानजे जीजा बहना लें ।।
पीएसी में पुलिस में हर विभाग दरबार । ये समाजवादी करें एक जाति से प्यार ।।
सम्प्रदाय एक जाति से जिनको रहा लगाव । ठेंगा बाकी को दिखा करें शेष पर घाव ।।
चेयरमैनों से छिनी चेयर भी दस बार । बात बात पर कोर्ट की ये पाते फटकार ।।
लँगड़ा कंधे पर चढ़ा अंधा लाठी थाम । चले चराने देश को भला करेंगें राम ।।

Monday, October 24, 2016

दीपावली 2016

दीपावली 2016
चलो जलालो दीप कि सैनिक सीमाओं पर जाग रहे। टूटी साँसों वाले नेता बैठ खाट पर खाँस रहे।।
अकर्मण्य बन रहे सिसकते जो पिछले सालों में यार-आज हाँफते डींग हाँकते वन प्लस वन बतलाते चार।।
उन्निस के बदले पचास का जिनको चहिये यार सबूत-किये दलाली जो जीवन भर उनको जन्मा नया कपूत।।
कहाँ इंदिरा मनमोहन या कहाँ शास्त्री कहाँ अटल,कहाँ जवाहर वीके मेनन तुलनाएँ हैं बहुत जटिल।।
अहंकार का रावण हारा पर साँसों में है जीवित-जब तक हाफिज़ अज़हर जिन्दा शान्ति कोटरों तक सीमित।।।

Saturday, December 12, 2015

कोर्ट-कचेहरी वाला गुस्सा !

नये साल में नयी कहानी घटने वाली है,
इनकी मँहगी दाल कि उनकी पूरी काली है।
बड़ी पुरानी है यह गाड़ी पहिये गले हुये,
भ्रष्ट आचरण के हैं दीमक जिसमें लगे हुये।
टूजी कामनवेल्थ घोटाले पड़े पुराने हैं,
अब तो यंग इण्डिया तक में फँसे सयाने हैं।
सीएजी ने फिर से खोले नये घोटाले हैं,
कहाँ कहाँ भागेंगे बबुआ जीजा-साले हैं।
+                        +                        +
कोर्ट-कचेहरी वाला गुस्सा संसद झेल रही,
खिसियानी बिल्ली-बिल्लों को जनता देख रही।
जनता ने धकिया कर जिनको किया किनारे है,
वही रोज हुड़दंग मचाते बहुत बिचारे हैं।
लेन देन में भी तो यारों नैतिकता रहती है!
राजनीति में धंधेबाजी जनता कब सहती है!!
बिन पेंदी के लोटे हैं ये उल्टी थाली हैं,
धरम न इनका कोई इनकी करनी काली है।
+                       +                          +
इशरत की खुल रही कहानी तीस्ता कहाँ गयीं?
कहाँ गये इशरत के चाचा वृन्दा कहाँ गयीं??
कई घुटाले खुलने बाकी परदे उठने हैं,
टूट रहे हैं सपने सारे टूटे टखने हैं।
देखो सन् सोलह में क्या क्या होने वाला है!
कौन हँसेगा कौन बिचारा रोने वाला है!! 

 उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
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अंधें बाँटें रेवड़ी बहरे रहे बटोर।रश्दी की बेइज्जती कहीं न कोई शोर।।1।।
तस्लीमा के दर्द को समझ न पाया वाम।पर वे बड़े सहिष्णु हैं जय जय सीता राम।।2।।
मन माफिक  मनमाफिया कर न सके वो काम।जिनकी किरपा से मिले बारम्बार इनाम।।3।।
ये अशोक से कवि बड़े लेखक कई महान।उपन्यास विन्यास में लगा लगा जी जान।।4।।
तलुवे घिस करते रहे जो नित नये प्रयास।लोकार्पण के बाद ही पूरी हुई छपास।।5।।
कुछ काले काला करें कलाकार का भेस।जिनपर अब भी चल रहे कई तरह के केस।।6।।
अपनेपर उपकार का चुकता करने कर्ज़। हैं अवार्ड लौटा रहे निभा रहे हैं फर्ज़।।7।।
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नदिया उल्टी बह चली उल्टी बही बयार।मन उचाट रहने लगा जब बदली सरकार।।8।।
दो सौ से चालीस गज सिमट गयी कालीन।मिली धूल में हेकड़ी बनते हैं शालीन।।9।।
लुटिया डूबी वाम की चल न सका छल छन्द,दोनों दल दल-दल हुये दोनों के मुँह बन्द।।10।।
बैठ मंथरा ने किया चमचों का आह्वान।जाओ सब जा कर करो सबकी नींद हराम।।11।।
"देखो पिछले साल के मोदी के कुछ काम।कुछ दिन में दिख जायेंगे उनके शुभ परिणाम।।12।।
मुश्किल में पड़ जायेगी हम सब की तब जान।उससे पहले है हमें करना काम तमाम।।13।।
असंतोष असहिष्णुता का कर करके जाप।जनता को भरमाइये कुछ तो करिये आप !!14।।
जिनको बाँटी रेवड़ी जिनको दिये इनाम।उन चमचों से बोलिये शुरू करें कुछ काम।।15।।
गुहा रोमिला को मिलो उनके फूँको कान।टुकड़े फेंक बुलाइये कहाँ गये इरफान??16।।
बोलो यदि फिर से गया लिखा नया इतिहास।इनकी भद पिट जायगी घुट जायेगी साँस।।17।।
खुल जायेगी पोल सब होगा नया हिसाब।रद्दी में बिक जाँयगी इनकी सभी किताब।।18।।
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सिर नवाय कर बन्दना निकल पड़े कुछ वीर।ये शर्मा आनन्द हैं चौबे दूबे पीर।।19।।
सिब्बल और चिदम्बरम् ये गुलाम-आजाद।मणिशंकर जयराम तक तब पहुँची फरियाद।।20।।
जोशी पटवर्धन सदृश जो जन थे गुमनाम,झंडा जिनका लाल है नारा जिनका वाम।।21।।
आगे आगे चल रहे पीछे है बारात,पैसे रखकर जेब में करें त्याग की बात।।22।।
मंतर फूँके कान में वृन्दा- सीताराम--"सुनो प्रजाजन! ध्यान से जिनको मिला इनाम-
नेहरू-मेनन की डगर यदि है तुम्हें पसन्द,एकसाथ हल्ला करो खूब मचाओ गन्ध।।24।।
हम सब हैं अब दर बदर झेल रहे अपमान,मत भूलो कर्तव्य तुम भूलो मत अहसान।।25।।
असन्तोष असहिष्णुता का कर करके जाप,जनता को भरमाइये गाल बजा कर आप"।।26।।
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चूहेदानी में फँसा चूहा हुआ उदास,टूटे टखने दाँत नख बची सास की आस।।27।।
इसे पेशबन्दी कहें या कि कहें संत्रास,रक्षा के होने लगे नये नये अभ्यास।।28।।
झूठ मूठ का भय दिखा मिर्च आँख में डाल,सौ सौ चूहे खा चुकी भगतिन भयी बिडाल।।29।।
लालू से माँगी शरण कम्युनिष्टों से हाथ,आँख दिखाई थी जिन्हें उनका माँगा साथ।।30।।
चीन चौक में देखिये इनकी सब करतूत,ममता के बंगाल में साँस रही अब टूट।।31।।
इन्हें शान्ति से क्या भला ! ये हैं रंगे सियार,राहुल बाबा सा मिला इनको नया शिकार।।32।।
मार काट के मार्ग पर चलने वाले लोग,इन्हें शान्ति सन्तोष का लगा देखिये रोग।।33।।
जिन्हें वर्ग संघर्ष का गया पढ़ाया पाठ,वे सहिष्णु बन घूमते मानव महा विराट।।34।।
घड़ियाली आँसू बहा ये नौटंकीबाज,सहिष्णुता के गीत हैं लगे सुनाने आज।।35।।
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सन् चौरासी में हुआ जो कुछ भी उत्पात,सहा देश ने शान्ति से सीने पर आघात।।27।।
कश्मीरी पंडित बने सहिष्णुता के पीर,घर छोड़ा पर देखिये धरे रहे वे धीर।।28।।
टाइटलर को भी कभी आयी नहीं खँरोच,दुर्जन सज्जन बन चले कभी न आयी मोच।।29।।
सहनशीलता के लिये इनको मिला इनाम,ये सांसद मंत्री बने नेता बने महान।।30।।
इनका धैर्य सराहिये करिये जय-गुणगान,चोर कहे कोतवाल को उल्टे पकड़ो कान।।31।।

Thursday, March 5, 2015

होली का उपहार

होली पर चलता दिखा मोदी का अभियान। हुई स्वच्छता "आप " की देखो नया विहान।।
बस सिसोदिया केजरी हैं सत्ता के केन्द्र । हक्के बक्के से दिखे भूषण औ योगेन्द्र ।।
होली पर उपहार में मिला जिन्हें अपमान। देखें दोनों काटते किसके किसके कान ।.
मोदी जैसे दिख रहे सुनो केजरीवाल । झाड़ू थामें हाथ में झाड़ रहे दीवाल ।।
भूषण की फोटो गिरी उखड़ गयी है कील । धूल चढ़ी योगेन्द्र पर धुँधलायी तस्वीर ।।
नाक ढाँक कर शाजिया खाँस रही हैं आज । बिन्नी को गिन्नी मिली हुई कोढ में खाज ।।
कंकड़ से गड़ने लगे अब मयंक के बोल । समझाना होगा जिन्हें क्या है उनका रोल ।।
ये संजय हैं राय हैं विश्वासी विश्वास । राम दौस रहने लगे गुम सुम और उदास ।।  
आशुतोष को जब लगा राजनीति का रोग । सोमनाथ बिड़लान से गये भुलाये लोग ।।
फुल्का हैं हल्के हुये खुश हैं देखो मान । यहाँ मचाने तहलका आये हैं खेतान ।।

Tuesday, February 10, 2015

सन्ताप

लाभ हानि जीवन मरण जीत हार व्यापार।इन्हें न छाड़ो ईश पर बैठो करो विचार।।
ऊँचे पद पर बैठ कर अपनी गरिमा त्याग।कभी न कड़ुआ बोलिये सब पर हो अनुराग।।

कोई गाली दे कभी उसको करिये माफ।कीचड़ में उगता कमल रहे साफ पर साफ।।
कहा किसीने मौत का सौदागर इकबार।पग पग पर मिलती रही उन्हें हार पर हार।।

अपनों की अवहेलना गैरों पर एतबार।मुश्किल होता चित्त को फुसलाना हर बार।।
लकड़ी की हाँड़ी नहीं चढ़ती बारंबार।आग "हाय" की जब लगे होता बंटाढार।।
तीरथ-बेदी-शाजिया-बिन्नी जैसे लोग।चढ़ा करैला नीम पर बिगड़ गया संजोग।।
पहले इनको माँजते कुछ दिन धरते शान।अमरित की घुट्टी चखा दिखलाते मैदान।।

कछुआ जीतेगा तभी अविरल चलता जाय।सुस्ताना उल्टा पड़े लक्ष्य दूर हो जाय।।
आन्दोलन धीमे पड़े धरना धरना बंद।बीजेपी डूबी इधर काँग्रेस मतिमन्द।।
ममता लड़ लड़ कर बढ़ी वामपंथ है कुन्द।जन गण मन देखे उसे दूर करे जो धुऩ्ध।।
धरने की आलोचना उचित नहीं है यार।जनता की आवाज़ पर लड़ा केजरीवाल।।
जनता ने कंधे बिठा किया बहुत सम्मान।अहं धूल चाटे,गिरे बड़े बड़े बलवान।।

बड़े बड़े वादे किये मोदी बने प्रधान।वादे कर कर केजरी सबके काटे कान।।
वादे कर उतरे खरा सेवक वही महान।बोये सींचे ध्यान से वही काटता धान।।  

Thursday, January 1, 2015

हाँफ रहा कोतवाल !

हाँफ रहा कोतवाल !
जयपुर में मेला जुटा लेखक जुटे विशेष,रश्दी बाहर ही रहे मिला न उन्हें प्रवेश।
तस्लीमा बंगाल में घुसने से मजबूर,पीके पर बलबा मचा किसका कहें कुसूर??
सोचो कैसे देख कर कुछ रोचक कार्टून,पगलाये थे लोग कुछ खौल उठा था खून।
बहस चली लंबी बहुत बदली गयी किताब,पर पत्थर के देव का रक्खे कौन खयाल?
आओ थोड़ा सोचलें क्या है इनका मूल,क्या छोटी सी बात को दिया जा रहा तूल??
  #                            #                                #                                       #
लीलाओं के व्याज से देवजनों का स्वांग,क्या यह करना ठीक है याकि टोटली रांग??
हर उत्सव त्यौहार पर जब जब छपते कार्ड,उन पर क्यों छपते भला शिव गणेश से लार्ड?
इधर स्वांग फिर बैठ कर पीना उधर शराब,बिना पिये पीके बुरा या फिर स्वांग खराब??
ठप्पे प्लास्टिक के ढलें छपें सुनहरे देव,सड़कों गलियों में पड़े दिख जाते स्वयमेव।
मन भर जाता ग्लानि से उठता यही विचार,इस पर कोई क्यों नहीं करता कभी विचार?
तोगड़िया या भागवत या सिंघल श्रीमान्,इन्हें न यह लगता कभी देवों का अपमान?
कड़वी पर बातें खरी कबिरा गये बताय,निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय।
राजनीति से बीस गज ऊँची उनकी राय,हिन्दू मुस्लिम को गये एक साथ समझाय। 
"काँकर पाथर जोरि के मस्जिद लयी बनाय,तापर मुल्ला बाँग दे बहरा हुआ खुदाय़।
पाथर पूजे हरि मिले तो पूजूँ मैं पहाड़,या से तो चक्की भली पीस खाय संसार।।"
पहले बन्द कराइये लीलायें औ स्वांग,जगह जगह पर मूर्तियाँ मन्दिर ऊट पटांग।
अपना घर सम्भले नहीं औरों को ललकार,चोर डाँटता देखिये हाँफ रहा कोतवाल!!

Sunday, December 28, 2014

नव वर्ष -2015

नव वर्ष 2015

नये वर्ष में हर्ष से नई सोच के साथ,आगे आगे ही बढ़ें लिये हाथ में हाथ।
साथ चलें बोलें सदा मन हों एक समान,सब निरोग हों सब रखें सबके हित का ध्यान।
मानवता से भी प्रखर प्राणिमात्र से प्रेम,मिटे भरम सब धरम का ऊँच नीच का गेम।।
#                                                #                                         #
अंधकार छँटने लगा दिखने लगा प्रकाश,आहट है बदलाव की थोड़ी लेलो साँस।
पहले क्या कोई कभी गोद लिये था गाँव,सब अपने में मस्त थे रख अंगद का पाँव।
झाड़ू सबके हाथ में क्या राजा क्या रंक,पहले दिखा न इस तरह लड़ता कोई जंग।
गंगा को बेटा मिला माँ का उसको प्यार,लगन कहो आस्था कहो होने लगा सुधार।
बरसों से जो ना हुआ वही हुआ इस बार,असी घाट की सीढ़ियाँ दिखने लगीं अपार।
कुछ तो आशा है बँधी कुछ तो है संतोष,कुछ कुछ है दिखने लगा लोगों में है जोश।
सर्वसमावेशी समझ सबको लेकर साथ,बनना मिटना साथ में लिये हाथ में हाथ।
हो विकास सबका सदा धरम भरम से दूर,पवन बहे सबको लगे पंडित मुल्ला घूर।।

आओ मिलकर दिया जलायें

अटलजी की स्मृति के साथ,उन्हें ही समर्पित ः

नवविहान की आहट पाकर तरुणाई ने ली ्अंगड़ाई,
आशाओं ने पंख पसारे पोर पोर छाई अमराई।
हमने जो भी ज्योतित पाया वह सर्वस्व लुटाते जायें,
आओ मिल कर दिया जलायें।

पग पग पर अंकुरित बीज को नई फसल का इंतज़ार है,
शाख शाख चिड़यों का डेरा और घोसलों में बहार है,
चूँ चूँ  चों चों चारा चुगते नन्हें पर फैला कर गायें,
आओ मिल कर दिया जलायें।

कोने में अलाव तो है पर अंगारों पर राख चढ़ी है,
राजनीति के सुन्दर तन पर बटमारों की नज़र गड़ी है,
पहचानो ये वही दरिन्दे कसम वफ़दारी की खायें-
इनको मिल कर परे हटायें,
आओ मिल कर दिया जलायें।

हरियाली चुक गयी चतुर्दिक् मौसम की मारा मारी है,
धरती का सीना चटका है मुरझाई क्यारी क्यारी है,
तपन मिटाने का मन हो तो चलो चलें कुछ पेड़ लगायें,
आओ मिल कर दिया जलायें।

उमस बढ़ी तो बरखा होगी तर होगा तन मन का कोना,
मिटे धरा की जब निर्धनता रुक जायेगा रोना धोना,
जल से भरा सरोवर तट है हर कोने में कमल खिलायें,
आओ मिल कर दिया जलायें।।

ये हैं कौवे बाज़

नये साल में नया रूप धर मौसम आया है,कहीं खुशी है और कहीं पर मातम छाया है।
वीतराग होनेका जिनको मिला नहीं आनन्द,टाँग खींचना जिनकी फितरत करें सदा छल छंद।
कुर्सी से चिपके रहने की आदत जिनको पड़ी,उनके चेहरे उतरे उतरे उनकी पीर बढ़ी।
कहीं धर्म की राजनीति है कहीं धर्म बदरंग,कहीं भागवत कहीं पे आज़म कहीं विहिप बजरंग।
शरद मुलायम लालू यादव चौटाला व नितीश,समधी साले यार पुराने आपस में छत्तीस।
एक साथ मिल चले बदलने भारत की तस्वीर,सब परिवारवाद के मारे जातीवादी वीर।।

वादी की रंगीनी देखो उल्टी बही बयार,साठ साल में जो न हो सका वही हुआ इस बार।
काँग्रेस की लुटिया डूबी डूब गयी कांफ्रेंस,डल के जल में कमल खिल उठा बिगड़ गया बैलेंस।
झारखंड में बहुमत पाकर मोदी हुये प्रसन्न,राहुल और सोनिया सारी काँग्रेस है सन्न।
बर्फीली चादर पर क्योंकर खिला कमल का फूल,सोचो राहुल और उमर से जनता क्यों प्रतिकूल।
काँग्रेस की चादर क्योंकर सिमट रही सब ओर,महाराष्ट्र हरियाणा दिल्ली जम्मू औ कश्मीर।
अरे कोयले की खानों में हीरा चमक उठा,दिल्ली क्यों कर रूठी रूठी झारखंड क्यों लुटा।।

जो जनता से कटा रहेगा समझे उसे असामी,जो जनता को लूटलूट कर जेब भरे मनमानी।
जो अंधे बन बन कर बाँटें अपनों को ही रोटी,चचा भतीजे जिनकी जनता या फिर बेटा बेटी।
बेटी लूटे या दमादजी बेचें जमीं बग़ीचे,उन्हें कमीशन से मतलब है बेचो दरी ग़लीचे।
इनका बस चलता तो सारा बिक जाता कश्मीर,मंदिर मस्ज़िद बिकते बिकता भारत माँ का चीर।।

इनके तो थोड़े हैं ज़्यादा पुरखों के हैं पाप,विल्हण कल्हण को दफ़ना कर बैठे हैं चुप चाप।
उद्भट अभिनवगुप्त न आये इनको कभी पसन्द,पृथ्वीराज न इनको पचते ये तो हैं जयचन्द।
इन्हें राम या भरतलाल का पता नहीं इतिहास,ये राणा का और शिवा का करते हैं उपहास।
राम गये बनवास त्याग कर अवधपुरी का राज्य,भरत त्याग की मूर्ति बन गये तज कर वह साम्राज्य।
भारत की ऐसी संस्कृति से जिन्हें रहा न लगाव,जो सत्ता के भूखे जिनको बस कुर्सी का चाव।
जो गाँधी के रामराज्य का समझ न पाये राज,उनके हिस्से अब रोना है ये हैं कौवे बाज ।।

Saturday, December 13, 2014

शारदा चिट फंड

शारदा चिट फंड

मोदी पर लगते रहे बार बार आरोप ।भट्टी में तपता रहा सहा सभी का कोप।।
अपनों की गाली सही गैरों के दुत्कार।कुन्दन सी पायी चमक दमक उठा इस बार।।
ममता को फिर क्या हुआ क्यों कर हैं नाराज।गाली तक बकने लगीं भौचक हुआ समाज।।
लालू थे जब जेल में अमित शाह थे बंद।तब ममता बोलीं नहीं अब क्यों यह छल छंद।।
चारा घोटाला गलत सही शारदा फंड।अपनों पर छाती फटे गैरों पर मुह बंद।।
बुद्ध देव तो भ्रष्ट थे हैं कुणाल नादान।मदनमित्र निर्दोष हैं श्रंजय बोस महान।।
वीपी सिंह के बाद अब ममता नंबर एक।चित्रकार नेता बनीं रहीं रोटियाँ सेंक।।
उनकी जब होने लगी रवि हुसैन से होढ़।पेंटिंग तब बिकने लगी कीमत एक करोड़।।